एक नोंक जो चुभ जाती है असत्य और छल की दीवार में, जो एक सुराख़ बना जाती है सत्य के प्रवेश के लिए... हिंदी साहित्य के माध्यम से।
Saturday, 1 June 2024
हिंदी साहित्य शॉर्ट नोट्स UGCNET MPPSC UPHESC UGCNET EMRS KVS TGT PGT UK LT, DSSSB, Chandigarh TGT Hindi
Thursday, 30 November 2023
हिंदी साहित्य प्रैक्टिस सेट - १ BPSC TRE 2.0 UGCNET RPSC MPPSC UPHESC Assistant Professor Hindi sahitya
हिंदी साहित्य क्विज मैराथन 2
हिंदी साहित्य के चुनिंदा प्रश्नों का संग्रह - 2
हिंदी साहित्य के चुनिंदा प्रश्नों का संग्रह - 3
हिंदी साहित्य के चुनिंदा प्रश्नों का संग्रह - 4
हिंदी साहित्य प्रैक्टिस सेट 1
https://youtu.be/K9LPmCkgvvM
हिंदी साहित्य प्रैक्टिस सेट 2
https://youtu.be/K5BXl7o_muI
हिंदी साहित्य प्रैक्टिस सेट 3
https://youtu.be/es4pJdLoY4E
हिंदी साहित्य प्रैक्टिस सेट 4
https://youtu.be/7v3n_qVmSxM
हिंदी साहित्य प्रैक्टिस सेट 5
https://youtu.be/DeCC-8MKoPY
हिंदी साहित्य के - हालावाद
https://youtu.be/42GlDqQZs3o
हिंदी आत्मकथाओं से पूछे जाने वाले प्रश्न
https://youtu.be/Y7qFu0ArDOM
रोज कहानी की समीक्षा - अज्ञेय
https://youtu.be/JHQxWSWG3X8
बातचीत निबंध - बालकृष्ण भट्ट
https://youtu.be/OiVaAkVqUTg
उसने कहा था - गुलेरी
https://youtu.be/PEBsXDo0-VM
अज्ञेय की कहानी - 'रोज' का सारांश
https://youtu.be/yduHvo_Bbcw
अज्ञेय की कविता - 'असाध्य वीणा' का सारांश
https://youtu.be/ENzqBHLcvM4
सुमित्रानंदन पंत से पूछे जाने वाले प्रश्न
https://youtu.be/KaM9nu3BKj8
कवि बिहारीलाल से पूछे जाने वाले प्रश्न
https://youtu.be/5eYJyaunVYA
प्रगतिवाद
https://youtu.be/Il3SSj-BIA0
भक्तिकाल
https://youtu.be/Z28pG3Fgz8M
Friday, 24 November 2023
हिंदी साहित्य प्रैक्टिस सेट BPSC HINDI TEACHER, UGCNET 2023 UPHESC, RPSC ASSISTANT PROFESSOR EXAM
HINDI SAHITYA PRACTICE SET
UGCNET HINDI SAHITYA CLASSES
RPSC ASSISTANT PROFESSOR VACANCY
BPSC HINDI TEACHER 2023
HINDI SAHITYA MCQS
1. 1. जन्मकाल के अनुसार निम्नलिखित कवियों का सही अनुक्रम है –
a. कबीर, नानक, दादू, सुंदरदास
b. नानक, कबीर, सुंदरदास, दादूदयाल
c. कबीर, दादूदयाल, नानक, सुंदरदास
d. नानक, सुंदरदास, कबीर, दादूदयाल
कबीर – 1398, जन्मस्थान – काशी
नानक – 1469, जन्मस्थान – तलवंडी
(लाहौर)
दादूदयाल – 1544, जन्मस्थान
– अहमदाबाद
सुंदरदास – 1596, जन्मस्थान
– राजस्थान
· आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने
किस कवि पर स्वतंत्र रूप से आलोचना नहीं लिखी है – कबीरदास
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने निम्न कवियों पर स्वतंत्र रूप से
आलोचना लिखी –
गोस्वामी तुलसीदास (1923)
जायसी ग्रंथावली (1924)
भ्रमरगीत सार (1925)
· कबीरदास रामानंद की शिष्य परंपरा में आते हैं।
· आचार्य रामचंद्र शुक्ल कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी भाषा
कहा है।
· श्यामसुंदर दास ने कबीर की भाषा को पंचमेल खिचड़ी कहा
है।
· हजारी प्रसाद द्विवेदी इन्हें भाषा के मामले में वाणी का
डिक्टेटर कहते हैं।
· बच्चन सिंह कबीर की भाषा को संतभाषा कहते हैं।
· कबीर की वाणी का संग्रह बीजक नाम से प्रसिद्ध है। इसके
तीन भाग हैं – साखी, सबद, रमैनी।
· कबीर परिचई के लेखक
कौन हैं – अनंतदास
· दादूदयाल के संप्रदाय का नाम ब्रह्म संप्रदाय था। इनके
पंथ का उत्तराधिकारी इनके पुत्र गरीबदास तथा मिस्कीनदास थे।
· दादू के दो प्रसिद्ध शिष्य रजज़्ब और सुंदरदास
थे।
· इनकी रचनाएं – हरडे बानी, अंगवधू, काया बोली।
· गुरु नानक की रचनाएं – जपुजी, आसदीबार, रहिरास, सोहिला।
· गुरु नानक जी सिक्ख संप्रदाय के आदि गुरु थे।
2.
निम्नलिखित में से कौन सा मोहन राकेश का नाटक नहीं
है –
a.
लहरों के
राजहंस
b.
आषाढ़ का एक
दिन
c.
आधे अधूरे
d.
अंधायुग
·
मोहन राकेश
के प्रसिद्ध नाटक –
आषाढ़ का एक दिन – 1958 – ऐतिहासिक नाटक
लहरों के राजहंस – 1963 – ऐतिहासिक नाटक
आधे – अधूरे – 1969 – समकालीन जिंदगी का पहला सार्थक हिंदी नाटक
·
आधे-अधूरे
नाटक को ‘मील पत्थर’ भी कहा जा सकता है।
·
लहरों के
राजहंस नाटक की रचना मोहन राकेश ने अश्वघोष के सौरानंद के आधार पर किया।
·
नई कहानी
के प्रवर्तकों में तीन लोगों का नाम आता
है –
राजेन्द्र यादव
मोहन राकेश
कमलेश्वर
·
अंधायुग (1955)
एक काव्य-नाटक है। इसके लेखक धर्मवीर भारती हैं। अंधायुग महाभारत के अवसान के
बाद की स्थिति का चित्रण है।
·
धर्मवीर भारती
की अन्य रचनाएं –
ठंडा लोहा (1952)
अंधा युग (1955)
कनुप्रिया (1959) – राधा और कृष्ण के प्रेम का वर्णन।
सात गीत वर्ष (1959)
देशान्तर – विदेशी कविताओं का संग्रह।
·
धर्मवीर भारती
मूलतः प्रेम के कवि हैं।
·
भारती जी
की कविता ‘प्रेमथ्यु गाथा’ एक लंबी कविता है।
3.
‘भट्टिनी’
किस उपन्यास की नायिका है –
a.
बाणभट्ट की
आत्मकथा
b.
चित्रलेखा
c.
दिव्या
d.
पुर्ननवा
· बाणभट्ट की आत्मकथा (1946) – हजारी प्रसाद द्विवेदी – उदात्त
प्रेम और सम्राट हर्षकालीन व्यवस्थाओं पर केंद्रित।
· चित्रलेखा (1934) –
भगवती चरण वर्मा – पाप और पुण्य के नैतिक प्रश्नों पर आधारित। इस उपन्यास पर फ्रेंच
उपन्यासकार अनातोले के उपन्यास थाया का प्रभाव माना जाता है।
· दिव्या (1945) – यशपाल – ऐतिहासिक कल्पना पर आधारित।
· पुनर्नवा (1973) – हजारीप्रसाद द्विवेदी
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Saturday, 18 November 2023
हिंदी साहित्य की तैयारी UGC NET Hindi sahitya BPSC hindi Teacher Assistant Professor Exam
Monday, 2 October 2023
UGC-NET DEC 2023 : HINDI SAHITYA SPECIAL NOTES - हिंदी भाषा की संवैधानिक स्थिति BPSC HINDI TEACHER VACENCY 2023
हिंदी भाषा की
संवैधानिक स्थिति
भारत के
संविधान में 14 सितंबर
1949 ई. को हिंदी को राजभाषा के रूप में मान्यता प्रदान की गई।
संविधान
के भाग-17 में अनुच्छेद 343-351 तक राजभाषा के विषय में प्रावधान किया गया
है।
इसके
अलावा संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भारतीय भाषाओं को मान्यता प्रदान
किया की गई है।
मूल संविधान की आठवीं अनुसूची में कुछ 14 भाषाएं सम्मिलित थीं। वे निम्न हैं –
असमिया, बंगला, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम,
मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू।
v 21वें
संविधान संशोधन अधिनियम, 1967 द्वारा सिन्धी जोड़ी गई
14 + सिन्धी =
15
v 71वें
संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा
15 + कोंकणी +
नेपाली + मणिपुरी = 18
v 92
वें संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा
18 + बोडो + डोंगरी
+ मैथिली + संथाली = 22
Ø अनुच्छेद 343 –
भारतीय संघ की राजभाषा हिंदी व लिपि देवनागरी होगी। भारतीय अंकों का रूप
अंतर्राष्ट्रीय होगा।
Ø अनुच्छेद 344 –
राष्ट्रपति आरंभिक 5 वर्षों के बाद से प्रत्येक 10 वर्षों पर राजभाषा आयोग का
गठन करेगा। आयोग हिंदी भाषा के आधिकारिक और शासकीय प्रयोजनों में प्रयोग की
सिफारिश करेगा। संघ और राज्य, एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच पत्रादि की भाषा के
रूप में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करेगा।
Ø अनुच्छेद 345 – किसी
राज्य का विधान मंडल, विधि द्वारा उस राज्य में प्रयोग की जा रही किसी एक या अधिक
भाषा को, या हिंदी को उस राज्य में शासकीय प्रयोजनों के लिए अंगीकार कर सकता है।
जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक अंग्रेजी का प्रयोग यथावत होता रहेगा।
Ø अनुच्छेद 346 – इस
अनुच्छेद के माध्यम से एक राज्य और दूसरे राज्य के मध्य पत्रादि की भाषा हिंदी हो
सकती है, यदि वे ऐसी माँग करते हों। यह अनुच्छेद इस प्रयोग को मान्यता प्रदान करता
है।
Ø अनुच्छेद 347 –
किसी राज्य की जनसंख्या के किसी भाग की माँग के अनुसार उस भाग द्वारा बोली जाने
वाली भाषा को राज्य की दूसरी भाषा के रूप में मान्यता प्रदान की जा सकती है।
Ø अनुच्छेद 348 – जब
तक संसद को उपबंध न करे, तब तक सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट की सभी कार्यवाहियाँ
अंग्रेजी में होगी। यदि किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से
हाईकोर्ट की कार्यवाहियों में हिंदी के प्रयोग को या उस राज्य के शासकीय प्रयोजनों
के लिए प्रयुक्त भाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है। लेकिन सारे निर्णय
अनिवार्य रूप से अंग्रेजी में ही दिए जाते हैं।
Ø अनुच्छेद 349 – राष्ट्रपति
भाषा के संदर्भ में किसी भी विधेयक पर राजभाषा आयोग और भाषा समिति के प्रतिवेदन पर
विचार करेगा, तत्पश्चात यह विधेयक संसद में पेश हो सकेगा। अर्थात राष्ट्रपति के
पूर्वानुमति के बिना भाषा संबंधी कोई विधेयक संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
Ø अनुच्छेद 350 – कोई
व्यक्ति संघ या राज्य के किसी अधिकारी को संघ या राज्य में प्रयोग होने वाली किसी
भी भाषा में अपनी शिकायत के लिए आवेदन करने का अधिकार रखता है।
भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के बच्चों को उनकी मातृभाषा में
शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार होगा।
भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के लिए राष्ट्रपति एक अधिकारी
नियुक्त करेगा, जो उनके भाषाई हितों की रक्षा करेगा। उसके निर्देशों को राष्ट्रपति
संसद में रखवाएगा और राज्यों की सरकारों को भेजवाएगा।
Ø अनुच्छेद 351 – संघ
का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार एवं विकास करे। आठवीं अनुसूची में
सम्मिलित सभी भाषाओं की शैलियोव और पदों को आत्मसात करके सामासिक व मिली-जुली
संस्कृति को बढ़ावा दे। मुख्य रूप से संस्कृत और गौण रूप से अन्य भाषाओं के शब्दों
का प्रयोग सुनिश्चित करना।
इसके
अलावा भी संविधान के भाग-5 के अनुच्छेद 120 में संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा
का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत संसद का कार्य अंग्रेजी या हिंदी में किया
जाएगा। इसके अलावा कोई भी संसद सदस्य अपनी मातृभाषा में सदन को संबोधित कर सकता
है।
संविधान
के भाय-6 के अनुच्छेद 210 के अंतर्गत राज्य विधान मंडलों की भाषा के बारे में
प्रावधान है, जिसके अंतर्गत विधान मंडल में राज्य की राजभाषा या हिंदी या अंग्रेजी
में कार्य किया जा सकता है। विधान मंडल का कोई सदस्य अपनी मातृभाषा में संबोधित
करने की अनुमति प्राप्त कर सकता है।
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सच कभी उंगलियां थामने की कोशिश करता है, जैसे कोई नवजात शिशु समस्त जातियों,पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर थामता है किसी अनुभवी हाथ को...
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● कविता बच्चा रो रहा है पैर पटक रहा है आँखों से आँसू बह रहा है पर माँ उसका हाथ अपने हाथ में लेकर बच्चे का बस्ता अपने कन्धे पर लटका...
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