पत्थरों पर पानी के बहाव का निशान
देखकर
सूखी नदी कल्पना में उभर जाती है
बह उठती है नदी स्मृति में
देखकर
सूखी नदी कल्पना में उभर जाती है
बह उठती है नदी स्मृति में
बुरे दिनों में वक्त के गहरे घावों पर
तुम्हारी सहानुभूति और प्यार की स्मृति
मेरे पत्थर मन मे
तुम्हारा चित्र उभर आया है
तुम्हारी सहानुभूति और प्यार की स्मृति
मेरे पत्थर मन मे
तुम्हारा चित्र उभर आया है