Friday, 28 April 2017

इंसान की हथेलियों का सच :कुशाग्र


सच कभी उंगलियां थामने की 
कोशिश करता है,
जैसे कोई नवजात शिशु
समस्त जातियों,पूर्वाग्रहों से 
मुक्त होकर
थामता है किसी अनुभवी हाथ को
जिसमें जीवन के तमाम पहलुओं की
खुरदुराहट उभर आई हो।

सच वास्तव में खोजता है
किसी ऐसे अनुभवी का हाथ
जिसका पाला झूठ से बार-बार पड़ा हो
जिससे वो जान सके 
उसका हर ठिकाना।

जब वो जीवन की ताल में 
ताल मिलाता है
तो सबसे पहले
इंसानों के हाथ की 
रेखाओं की तलाशी लेता है
जिसमें छुपे होते हैं 
झूठ के तमाम मैले निशान
जिससे कि वो जान सके कि
उसका असली ठिकाना कहाँ है......

             -आशीष कुमार तिवारी 

No comments:

हिंदी साहित्य शॉर्ट नोट्स UGCNET MPPSC UPHESC UGCNET EMRS KVS TGT PGT UK LT, DSSSB, Chandigarh TGT Hindi

💐DSSSB TGT PGT, UK LT, MPPSC UPHESC💐 UGCNET EMRS सभी परीक्षाओं के लिए बेहतरीन नोट्स। साथियों आप सभी के सुविधानुसार हिंदी साहित्य के स्पेशल...