● कविता
बच्चा रो रहा है
पैर पटक रहा है
आँखों से आँसू बह रहा है
पर माँ उसका हाथ अपने हाथ में लेकर
बच्चे का बस्ता अपने कन्धे पर लटकाये
निर्दयी होकर स्कूल ले जा रही है
बच्चे को देखकर दया तो बहुत आ रही
पर माँ की नज़र से सोच पाना बड़ा कठिन है
वो जानती है भविष्य के थपेड़ो को
जो इसी बच्चे को आगे बेरोजगार बना देगी
इसलिए उसे मजबूत बनाने के लिए
निष्ठुर बन गयी
बहुत दूर तक देख पा रहा हूँ कि
माँ उसे लेकर चली जा रही है
माँ रुक नहीं रही उस बच्चे के आँसुओं से
माँ उसे पहुंचा आना चाहती है
उस जगह तक
जहां से वो अपना भविष्य बनाने में समर्थ हो सके
माँ के जैसा सोच पाना बड़ा कठिन है....
आशीष कुमार तिवारी

